तीन दिन में कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी, काटिया पुनर्वास स्थल में विवाद

चांडिल के काटिया पुनर्वास स्थल में सार्वजनिक स्थानों के उपयोग को लेकर विवाद सामने आया है। विस्थापित परिवारों ने रोक-टोक और धमकी का आरोप लगाते हुए प्रशासन से सीमांकन, जांच और सुरक्षा की मांग की है।
चांडिल, 28 सितंबर। चांडिल डैम के विस्थापितों के पुनर्वास स्थल काटिया में सार्वजनिक स्थानों के उपयोग को लेकर विवाद सामने आया है। रूदिया पंचायत अंतर्गत काटिया पुनर्वास स्थल के विस्थापित परिवारों ने कुछ लोगों पर तालाब में स्नान करने, सार्वजनिक रास्ते से आवागमन, खुले मैदान में शौच तथा मवेशियों को चराने से रोकने और कथित रूप से धमकाने का आरोप लगाया है।
मामले को लेकर विस्थापित परिवारों ने सोमवार को चांडिल थाना प्रभारी और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी को लिखित आवेदन सौंपकर मामले की जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। विस्थापितों ने कहा है कि यदि तीन दिनों के भीतर उचित कार्रवाई नहीं होती है, तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
पुनर्वास की जमीन तक सीमित रहने का आरोप
विस्थापितों का आरोप है कि काटिया टोला गोढ़डीह निवासी मोहन गौड़, शिव चरण सिंह, बैलून सिंह, बृहस्पति सिंह, रवि सिंह सहित कुछ अन्य लोगों द्वारा उन्हें पुनर्वास स्थल पर निर्धारित जमीन तक ही सीमित रहने के लिए कहा जा रहा है।
विस्थापित परिवारों के अनुसार, उन्हें यह कहकर सार्वजनिक स्थानों के इस्तेमाल से रोका जा रहा है कि सरकार ने उन्हें 12.5 डिसमिल जमीन उपलब्ध कराई है और उन्हें उसी जमीन के भीतर रहना चाहिए।
पत्थर मारने और तालाब में स्नान से रोकने का आरोप
काटिया पुनर्वास निवासी जगन्नाथ किस्कू ने आरोप लगाया कि शौच के लिए जाते समय उन्हें पत्थर मारकर वहां से भगाया गया। वहीं पूनम देवी ने आरोप लगाया कि वह अपने बच्चों के साथ तालाब में स्नान करने गई थीं, जहां उन्हें स्नान करने से रोकते हुए वहां से चले जाने के लिए कहा गया।
विस्थापित परिवारों का कहना है कि यदि जमीन की सीमा या सार्वजनिक स्थानों के उप
