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नाबालिग से दुष्कर्म मामले में आरोपी को आजीवन कारावास, 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया

Admin13/10/2026👁️ 18 Views
नाबालिग से दुष्कर्म मामले में आरोपी को आजीवन कारावास, 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया

चांडिल थाना सरायकेला-खरसावां जिले में नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में अदालत ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। यह फैसला नाबालिगों के खिलाफ अपराध के मामलों में न्यायिक कार्रवाई की अहमियत को दर्शाता है।

चांडिल थाना सरायकेला-खरसावां (झारखंड): झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले से नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में अदालत के सख्त फैसले की खबर सामने आई है। इस मामले में आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। इसके अतिरिक्त अदालत ने आरोपी पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

मामले से जुड़ी जानकारी के अनुसार, यह प्रकरण चांडिल थाना क्षेत्र से संबंधित है। नाबालिग के साथ हुए अपराध के मामले में न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। जुर्माने की राशि भी निर्धारित की गई है।

नाबालिगों के खिलाफ अपराध पर सख्त कार्रवाई

नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराध गंभीर प्रकृति के अपराध हैं। ऐसे मामलों में पुलिस जांच, साक्ष्यों की प्रस्तुति और न्यायिक प्रक्रिया की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अदालत का फैसला पीड़ितों को न्याय दिलाने तथा बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के महत्व को रेखांकित करता है।

पीड़ित की पहचान गोपनीय रखना जरूरी

नाबालिग से जुड़े यौन अपराधों के मामलों में पीड़ित की पहचान सार्वजनिक नहीं की जानी चाहिए। समाचार प्रकाशित करते समय भी पीड़ित की निजता और गरिमा की रक्षा करना आवश्यक है।

इस मामले में आरोपी का नाम, घटना की तारीख, अदालत का नाम और फैसले से संबंधित अन्य विस्तृत जानकारियों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं हो सकी है। इसलिए इन विवरणों को आधिकारिक पुलिस या न्यायालय के रिकॉर्ड से सत्यापित करने के बाद ही प्रकाशित किया जाना चाहिए।

प्राप्त मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता के पिता ने 26 जनवरी 2025 को चांडिल थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के मुताबिक, उनकी बेटी गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होने के लिए स्कूल गई थी, लेकिन शाम तक घर नहीं लौटी। इसके बाद परिवार ने पुलिस से संपर्क किया।

पीड़िता के बयान के अनुसार, आरोपी उसे पहले भी परेशान करता था और उसके भाई को नुकसान पहुंचाने की धमकी देता था। शिकायत में आरोप लगाया गया कि 26 जनवरी को स्कूल से लौटते समय आरोपी ने अपने साथियों के साथ उसे जबरन वाहन में बैठाया और दीघा ले गया, जहां उसके साथ दुष्कर्म किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, बाद में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया था।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सरायकेला के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश रमाशंकर सिंह की अदालत ने आरोपी बिरजू पोद्दार उर्फ बीजू पोद्दार को पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत दोषी ठहराते हुए जीवन के अंतिम सांस तक कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।

इसके अलावा, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 96 और 137(2) के तहत पांच वर्ष के सश्रम कारावास तथा पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा भी सुनाई गई। रिपोर्ट के अनुसार, सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।

यह फैसला नाबालिगों के खिलाफ अपराध से जुड़े मामलों में न्यायिक प्रक्रिया की अहम भूमिका को सामने लाता है। ऐसे मामलों में पीड़ित की पहचान और निजता की रक्षा करना भी बेहद जरूरी है।

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