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चांडिल डैम विस्थापितों का एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन आज, अधिकारों की मांग को लेकर जुटे विस्थापित

Admin7/10/2026👁️ 109 Views
चांडिल डैम विस्थापितों का एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन आज, अधिकारों की मांग को लेकर जुटे विस्थापित

चांडिल डैम विस्थापितों से जुड़े मुद्दों को लेकर विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन एवं विस्थापित मुक्ति वाहिनी के बैनर तले 7 अक्टूबर 2026 को एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम सुवर्णरेखा परियोजना अंचल एवं प्रमंडल कार्यालय के समक्ष आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में विस्थापित परिवार और समर्थक शामिल हुए।

चांडिल, 7 अक्टूबर 2026। चांडिल बांध से विस्थापित परिवारों के लंबित अधिकारों और विभिन्न मांगों को लेकर बुधवार को सुवर्णरेखा चांडिल बांध कार्यालय परिसर में एक दिवसीय शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया गया। विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन और विस्थापित मुक्ति वाहिनी के संयुक्त नेतृत्व में आयोजित इस धरने में बड़ी संख्या में विस्थापित महिला-पुरुष शामिल हुए।

धरने के दौरान विस्थापितों ने पुनर्वास, मुआवजा, जमीन का पट्टा, रोजगार और मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। इस दौरान संबंधित पदाधिकारी को 15 सूत्री मांग पत्र सौंपा गया। विस्थापितों ने मांगों पर तीन माह के भीतर ठोस कार्रवाई की मांग की है।

वर्षों से लंबित अधिकारों के समाधान की मांग

विस्थापितों का कहना है कि चांडिल बांध परियोजना के कारण विस्थापन के वर्षों बाद भी बड़ी संख्या में परिवार अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कई परिवारों को अब तक मुआवजा, पुनर्वास, जमीन का पट्टा और रोजगार जैसी सुविधाएं पूरी तरह नहीं मिल पाई हैं।

प्रदर्शनकारियों ने विस्थापितों की समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए झारखंड विस्थापन एवं पुनर्वास आयोग के गठन और उसके प्रभावी क्रियान्वयन की मांग की।

पुनर्वास स्थल के पट्टा और सीमांकन का मुद्दा

चांडिल डैम विस्थापितों का एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन आज, अधिकारों की मांग को लेकर जुटे विस्थापित sponsored offerBUY NOW →

विस्थापितों ने पुनर्वास स्थलों के भूखंडों का पट्टा और सीमांकन कराने की मांग की। साथ ही अवैध कब्जे हटाने तथा आंशिक रूप से प्रभावित गांवों का दोबारा सर्वे कर पात्र परिवारों को पूर्ण विस्थापित का दर्जा देने की मांग रखी गई।

भूमि, पेड़, तालाब, कुआं और बाउंड्री वॉल से संबंधित लंबित मुआवजे का भुगतान करने की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई गई।

मत्स्य पालन और रोजगार में प्राथमिकता की मांग

धरने में मत्स्य पालन और नौकायन के क्षेत्र में स्थानीय विस्थापितों को प्राथमिकता देने की मांग की गई। इसके साथ ही मत्स्य पालन पर निर्भर परिवारों के लिए वैकल्पिक रोजगार की व्यवस्था करने की मांग भी रखी गई।

विस्थापितों ने भर्ती नियमावली-2025 के तहत रोजगार की प्रक्रिया शुरू करने की भी मांग की।

116 प्रभावित गांवों में समान प्रावधान की मांग

विस्थापितों ने चांडिल बांध से प्रभावित सभी 116 गांवों में समान प्रावधान लागू करने की मांग की। इसके अलावा विकास पुस्तिका में दर्ज लंबित कार्यों को पूरा कराने की मांग भी उठाई गई।

पुनर्वास नीति-2012 के तहत आवास, परिवहन और स्वरोजगार अनुदान की राशि को वर्तमान महंगाई के अनुरूप बढ़ाने की मांग भी 15 सूत्री मांगों में शामिल रही।

सोलर प्रोजेक्ट से पहले ग्रामसभा की सहमति की मांग

जलाशय में प्रस्तावित सोलर प्रोजेक्ट को लेकर भी विस्थापितों ने अपनी चिंता जाहिर की। उनकी मांग है कि परियोजना से संबंधित किसी भी निर्णय से पहले प्रभावित क्षेत्रों की ग्रामसभा की सहमति ली जाए।

इसके अलावा पुनर्वास कार्यालय-2 और विशेष भू-अर्जन कार्यालय में कथित दलाल प्रथा पर रोक लगाने की मांग भी की गई।

जल भंडारण और प्राकृतिक क्षति के मुआवजे का मुद्दा

विस्थापितों ने मांग की कि जब तक उनके लंबित अधिकारों और समस्याओं का समाधान नहीं होता, तब तक जल भंडारण को लेकर उचित निर्णय लिया जाए।

उन्होंने प्राकृतिक आपदा और वन्यजीवों से होने वाली क्षति का तत्काल मुआवजा देने तथा सभी विस्थापित गांवों में सरकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने की मांग भी रखी।

तीन माह में कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी

धरना-प्रदर्शन के दौरान विस्थापित नेताओं ने कहा कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि विस्थापित परिवारों के न्याय, अधिकार और सम्मान के लिए है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तीन माह के भीतर मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इसके तहत अनिश्चितकालीन धरना, भूख हड़ताल, मशाल जुलूस, विधानसभा घेराव और मुख्यमंत्री आवास घेराव जैसे शांतिपूर्ण आंदोलन किए जाने की बात कही गई।

धरने में सैकड़ों की संख्या में विस्थापित महिला और पुरुष मौजूद रहे। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने अपनी मांगों को लेकर एकजुटता दिखाई और संबंधित विभाग एवं प्रशासन से जल्द समाधान की मांग की।

अब विस्थापित परिवारों की नजर प्रशासन और संबंधित विभाग की ओर से सौंपे गए 15 सूत्री मांग पत्र पर होने वाली कार्रवाई पर है। चांडिल डैम विस्थापितों का यह धरना-प्रदर्शन एक बार फिर पुनर्वास और विस्थापित अधिकारों से जुड़े मुद्दों को चर्चा में ले आया है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग और प्रशासन की ओर से इन समस्याओं के समाधान के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

स्थान: सुवर्णरेखा परियोजना अंचल एवं प्रमंडल कार्यालय के समक्ष तारीख: 7 अक्टूबर 2026 आयोजक: विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन एवं विस्थापित मुक्ति वाहिनी मुद्दा: चांडिल डैम विस्थापितों के अधिकार एवं समस्याएं

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